Thursday, April 9, 2020
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राडार तकनीक से साबित हो जायेगा की ज्ञान वापी मस्जित एक मंदिर है, यहाँ शिवलिंग है विश्‍वेश्‍वरनाथ

Gyan Vapi Masjit Was Temple
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Image Credits: Twitter Post

वाराणसी, UP: उत्तर प्रदेश की ज्ञानवापी मस्जिद आज फिर मीडिया की सुर्ख़ियों में हैं। अयोध्‍या में रामलला विराजमान के पक्ष में सुप्रीम फैसले के बाद अब वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर मुकदमा सुर्खियों में है। ज्ञानवापी मस्जिद के पक्षकारों का दावा था कि इलाहबाद हाईकोर्ट से एक आदेश की कॉपी न मिल पाने के कारण निचली अदालत में उनका केस कमजोर पड़ रहा है। किन्तु अब उस आदेश की कॉपी मिल गई है, जिसके कारण मामला लटका था।

आदेश की कॉपी वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट की अदालत में 18 मार्च को पेश की जाने वाली है अब ऐसा अनुमान है की मस्जिद पक्ष यह माँग करेगा कि इस मामले की सुनवाई को तत्काल रोक दी जाए। मस्जिद के पक्षकारों का दावा है कि उच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक़ निचली अदालत में इसकी सुनवाई नहीं हो सकती है।

मस्जिद के वकील इस कॉपी को 18 मार्च को फास्ट ट्रैक कोर्ट में पेश कर मामले की सुनवाई निचली अदालत में रोके जाने की माँग करने की तैयारी में लगे हुए हैं। ऐसे में इस मुद्दे पर कहते हुए अंजुमन इंतजामिया मस्जिद के जॉइंट सेक्रेटरी सैयद यासीन ने कहा की सिविल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट की अदालत के सामने यह माँग उठाई गई थी कि इस केस पर हाईकोर्ट ने पहले ही रोक लगा रखी है, इसलिए इसकी सुनवाई निचली अदालत में नहीं की जा सकती।

उनके मुताबिक़ इसे 4 फरवरी को सिविल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट की अदालत ने खारिज कर दिया था। फिर 4 फरवरी के इस आदेश को 26 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। इस कारण यह केस निचली अदालत में नहीं हो सकता है। उनके अनुसार हम इलाहबाद हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी 18 मार्च को सुनवाई की निर्धारित तारीख पर सिविल जज फास्ट ट्रैक कोर्ट की अदालत में पेश कर इस केस की सुनवाई पर रोक लगाने की माँग करेंगे।

Mysterious Shiva Temples
Demo Image

इस मुद्दे पर मंदिर पक्ष और पुरातत्व विभाग द्वारा सारे ज्ञानवापी मस्जित परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने की अपील की गई है। मतलब फिर से इस मामले की सुनवाई रुक सकती है, परन्तु पूरे में सच सामने आ रहा है। हिन्दू पक्ष ने इस मंदिर के बारे में अपनी दलील में बताया था कि 15 वीं शताब्दी में मुगल बादशाह अकबर के रूल के समय हिन्दू राजाओं मान सिंह और टोडरमल द्वारा इस मंदिर के जीर्णोध्दार का काम संपन्न कराया गया था।

इस मामले में मंदिर पक्ष का कहना है कि इसके पुरातात्विक और ऐतिहासिक साबुत अभी भी उपलब्ध हैं। इस मामले को और पुख्ता करने के लिए राडार तकनीक का उपयोग करने की माँग की गई है। फिर खुदाई के बाद जो रिपोर्ट आएगी, उससे मंदिर पक्ष का दावा और मज़बूत हो जाएगा। जबकि मस्जिद पक्ष लगातार सुनवाई को रोकने और इसमें दिक्कत पैदा करने की भरपूर कोशिश कर रहा है।

Gyanvapi masjid ke archeological survey se samne aaega sach.Court ki agli sunvaai hogi 18 March ko.Ayodhya ke baad No. Lag chuka hai Kashi Ka Intzaar kijiye.

इस मुकदमे में वर्ष 1998 में हाई कोर्ट के स्‍टे से सुनवाई स्‍थगित हो गई थी, जो अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुपालन में फिर से शुरू हुई है। मंदिर पक्ष का कहना है की कथित विवादित ज्ञानवापी परिसर में स्‍वयंभू विश्‍वेश्‍वरनाथ का शिवलिंग आज भी स्‍थापित है। मंदिर परिसर के हिस्‍सों पर मुसलमानों ने अपना अधिकार करके मस्जिद बना दी थी। 15 अगस्‍त 1947 को भी विवादित परिसर का धार्मिक स्‍वरूप मंदिर का ही था। इस मामले में केवल एक भवन ही नहीं, बल्कि बड़ा परिसर विवादित है।

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