Friday, September 25, 2020
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कश्मीर के रघुनाथ मंदिर में दोबारा हिन्तुत्व की गूंज, एक समय दहशतगर्दों ने जला दिया था, पूरी कहानी

Raghunath Mandir Shrinagar Kashmir
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Photo Credits: Twitter

Srinagar/Kashmir: जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) से धरा 370 (Article 370) क्या हटी, अब घाटी की रौनक और शान्ति कौटने लगी है और कश्मीर में हिंदुत्व की गूंज भी सुनाई देने लगी है। कश्मीर की खोई विरासत और प्राचीन हिन्दू कश्मीरी परंपरा को वापस स्थिर करने का कार्य शुरू हो रहा है। लगभग तीन दशक पहले मिलिटेंट्स और चरमपंथियों द्वारा जला दिए गए श्रीनगर के एतिहासिक रघुनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य आरंभ हो गया है।

आपको बता दे की करीब 31 साल पहले समुदाय विशेष की भीड़ ने भगवान रघुनाथ की प्रतिमा को खंडित कर झेलम नदी (Jhelum Rever) में फेंक दिया था और मंदिर को अग्नि के हवाले कर दिया था। सब ठीक रहा, तो जल्द वहां भगवान राम के जयकारे गूंजेंगे। Raghunath Temple मंदिर के जीर्णाेद्धार का कार्य राज्य पर्यटन विभाग को सौंपा गया है। मंदिर के साथ-साथ वहां झेलम (Jhelum)) के घाट का भी सौंदर्यीकरण किया जाएगा।

ऐसा होने से कश्मीर घाटी में रह रहे कश्मीरी पंडित (Kashmiri Pandit) तो प्रसन्न हैं ही, इसके अलावा अपना सब-कुछ छोड़ पलायन करने वाले हिन्दू परिवारों (Hindu Family) की आंखों में भी उम्मीदों की नई किरण दिखने लगी है। देशभर के पर्यटक भी इस प्राचीन हिन्दू विरासत के दर्शन कर सकेंगे।

बता दे की डोगरा शासक महाराजा रणबीर सिंह ने लगभग 160 वर्ष पहले श्रीनगर में झेलम दरिया के किनारे इस मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर में कई बेशकीमती पांडुलिपियां और धर्मग्रंथों पर आधारित लाइब्रेरी भी थी। मंदिर (Raghunath Mandir) परिसर में एक स्कूल भी था। स्कूल आज भी है, लेकिन अब मंदिर और स्कूल के बीच में दीवार खड़ी हो चुकी है।

कश्मीर में अलगाववाद और दहशत का दौर शुरू होने से पहले भी यह मंदिर विशेष समुदाय की चरमपंथी तत्वों की आँखों को रास नहीं आता था। 1989 में उग्र भीड़ ने मंदिर पर पहला प्रहार किया। इसके बाद 24 फरवरी 1990, 13 अप्रैल 1991 और फिर 8 मई 1992 को भी पॉइंट किया गया था। मंदिर में प्रतिष्ठित भगवान श्रीराम और माता सीता की प्रतिमाओं को खंडित कर झेलम नदी में फेंक दिया गया।

इसके अलावा दानवों ने यज्ञशाला बर्बाद कर दी गई और लाइब्रेेरी को अग्नि के हवाले कर दिया था। मंदिर के पास के सात मकान भी पॉइंट किये गए थे। इसके बाद मंदिर खण्डार और सुनसान हो गया। मंदिर के रास्ते पर अतिक्रमण कर लिया गया। मंदिर के नीचे झेलम का घाट भी अब दयनीय हालत में है। आल पार्टी माइग्रेंट कैंप को-ऑर्डिनेशन कमेटी के चेयरमैन विनोद पंडित ने सरकार के फैसले को ऐतिहासिक बताया है।

अब जब मोदी सरकार ने घाटी की ज़िम्मेदारी ली है, तो हालात सुधरने के दावों के बीच तत्कालीन राज्यपाल स्व. एसके सिन्हा और एनएन वोहरा ने मंदिर की मरम्मत का काम शुरू करवाना चाहा पर कब बंद हुआ, किसी को पता नहीं चला। कश्मीरी पंडित भी इस मंदिर के उत्थान के लिए आवाज़ उठा रहे है।

यह मंदिर (Hindu Mandir) जम्मू के रघुनाथ मंदिर से ज्यादा भव्य था, परन्तु इसे बर्बाद कर दिया गया। अब मरम्मत शुरू हुई है, तो घाटी के हिन्दू समुदाय के लोगो में एक ख़ुशी और आशा की किरण जागी है। रघुनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण घाटी में कश्मीरी पंडितों की वापसी का रास्ता भी तैयार करेगा, साथ ही यह कश्मीर में सनातन परंपराओं की वापसी के लिए लाभकारी भी साबित होगा।


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