Tuesday, August 4, 2020
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राम मंदिर अयोध्या पर योगी आदित्यनाथ हुए भावुक, इस संघर्ष को याद करते हुए कही बड़ी बात

Ram Mandir Yogi Adityanath
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Luckmow/Uttar Pradesh: अयोध्या में भगवान श्री राम की 251 मीटर ऊंची प्रतिमा लगाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। मीडिया की खबर में बताया गया है की राम मंदिर ट्रस्ट के बनने के साथ ही भगवान श्री राम की प्रतिमा का निर्माण भी शुरू हो गया था। नोएडा के मूर्तिकार राम सुतार, जिन्होंने गुजरात में सरदार पटेल की 183 मीटर ऊंची प्रतिमा डिजाइन की थी, को भगवान श्री राम की मूर्ति के निर्माण का काम सौंपा गया है।

मूर्तिकार राम सुतार और उनके बेटे अनिल सुतार पद्म भूषण से सम्मानित हो चुके हैं। राम सुतार भगवान राम की मूर्ति के निर्माण में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा कि भगवान राम की मूर्ति के डिजाइन के पारित होने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ बातचीत की है। जिसमें मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मूर्ति पूरी तरह से स्वदेशी होनी चाहिए।

जानकरी हो की दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा के सेक्टर-19 में रहने वाले राम सुतार का सेक्टर-63 में एक स्टूडियो है। उन्होंने अब तक 15000 से ज्यादा मूर्तियां बनाई हैं। उन्हें सरकार से पद्म भूषण और पद्म श्री मिल चुका है। राम सुतार ने अपनी टीम के साथ गुजरात की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भी बनाई है।

5 अगस्त को होने जा रहे राम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम को लेकर प्रशासन की ओर से तैयारियां जोरों पर हैं। 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर का भूमि पूजन करेंगे और इसकी आधारशिला रखेंगे। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने एक बेहद भावुक लेख लिखा है। इसमें उन्होंने भूमि पूजन को उल्लास, आह्लाद, गौरव एवं आत्‍मसंतोष का अवसर बताया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा कि श्रीराम के आदर्शों पर चलकर एक नए भारत का निर्माण हो रहा है और ये युग रामराज्य और मानवकल्याण का है।

बता दे की 5 अगस्त 2020 को इस शुभ कार्य का मुहूर्त में दोपहर 12.30 से 12.40 के बीच है, जहाँ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी श्री रामलला के भव्य मंदिर की आधारशिला रखेंगे। श्री राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण हेतु भूमिपूजन के अवसर पर दादागुरू ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत श्री दिग्विजयनाथ जी महाराज और पूज्य गुरूदेव ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्‍वर महंत श्री अवेद्यनाथ जी महाराज को याद किया जा रहा है। योगी अत्यंत भावुक है कि वे इस अवसर के साक्षी नहीं बन पा रहे।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने इस लेख में जन्मभूमि आंदोलन के दौरान गुरु अवैद्यनाथ महाराज और संत परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज को याद करते हुए लिखा है की वर्ष 1989 में जब मंदिर निर्माण हेतु प्रतीकात्मक भूमिपूजन हुआ, तो भूमि की खोदाई के लिए पहला फावड़ा स्वयं अवैद्यनाथ महाराज एवं पूज्य संत परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज ने चलाया था। इन पूज्य संतों की पहल, श्रद्धेय अशोक सिंघल जी के कारण पहली शिला रखने का अवसर श्री कामेश्वर चौपाल जी को मिला। आज श्री कामेश्वर जी श्री राम जन्‍मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के सदस्य होने का सौभाग्य धारण कर रहे हैं।

फिरंगी हुक़ूमत के दौरान राम मंदिर निर्माण के अभियान को बढ़ावा दिया महंत दिग्विजय नाथ जी महाराज ने। साल 1934 से लेकर 1949 तक उन्होंने इसके लिए लगातार संघर्ष किया। ऐसा बताया जाता है कि जब 22-23 दिसंबर 1949 के दौरान जब विवादित ढाँचे में श्रीराम प्रकट हुए। ठीक उस वक्त तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत दिग्विजय नाथ जी महाराज साधू संतों के साथ बैठ वहीं पर कीर्तन कर रहे थे।

राम मंदिर शिलान्यास और भूमिपूजन का समय निकट होने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई अहम बातें कही हैं। इस शुभ घड़ी की प्रतीक्षा करते हुए पीढ़ियाँ समाप्त हो गईं। राम के नाम में आस्था रखने वालों ने 5 शताब्दी तक इस अवसर की प्रतीक्षा की। सभी कठिनाइयों के बाद भी राम मंदिर निर्माण के लिए संघर्ष करने वालों ने हार नहीं मानी।

अब इसका रिजल्ट यह है कि राम मंदिर बहुत जल्द आकार लेने वाला है। करोड़ों लोगों की आस्था का सबसे प्रबल प्रतीक उनके सामने होगा। मर्यादा पुरुषोत्तम का एक वनवास सदियों पहले ख़त्म हुआ था और दूसरा अब ख़त्म हुआ है। इसके बाद वह अपनी जन्मभूमि स्थित सिंहासन पर विराजमान होंगे। इस पूरे अभियान और संघर्ष में कुछ नाम ऐसे थे, जिनके उल्लेख के बिना पूरा विषय अधूरा है।


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